Panchpargania Bhasa – झारखंड जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा

झारखंड जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा- पंचपरगनिया भाषा

पंचपरगनिया भासा – परिचय

Panchpargania Bhasa – पंचपरगनिया भासा माहने हिंदी, बांग्ला, उड़िया, नागपुरी,

कुरमाली, खोरठा आउर दोसर भासा केर मिलल जुलल रूप हेके।

पंचपरगनिया भाषा की उत्पत्ति

पंचपरगनिया भासा केर उद्भव आभिरी अपभ्रंश लेक होय आहे।

आभिरी भासा केर दसर नाम तामड़िया हेके।

पंचपरगनिया भाषा की लिपि

पंचपरगनिया भासा केर लिपि – कइथी, बांग्ला आर देवनागरी केर रुपे पावायला।

पंचपरगनिया भासा केर बनाल लिपि “झाड़ लिपि” हेके।

इटा डाक्टर करमचंद अहिर बनाय आहयं।

डॉक्टर गियरसन के अनुसार

पांच परगना में बोली जाने वाली बोली पूर्वी मगही का एक रूप है,

जो पंचपरगनिया के नाम से जानी जाती है।

चूंकि ये तमाड़ परगना में सबसे अधिक प्रचलित है इसलिए यह

माड़िया भी कही जाती है। 

पंचपरगनिया भासा केर आउर अन्य नाम हेके

खेरवारी, गंवारी, सदानी, सदरी, तमड़िया, दिकुकाजी,

अहीरी, टाईंडराजिया, पयारी, टाईंड बांगला आउर हेंठराजिया.

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